स्टाफ की कमी से जूझ रहे आयुर्वेदिक अस्पताल 

 अधिकारियों की मंशा ठीक नहीं बिगड़ रही व्यवस्था
 आपस में ही उलझे आयुर्वेदिक चिकित्सक, अधिकारी पर लग रहे उत्पीडन के आरोप  

Rishi news riport orai । जिले के आयुर्वेदिक व यूनानी अस्पताल इन दिनों स्टाफ की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। हालत यह है कि अस्तपालों के सापेक्ष आधे चिकित्सक भी जिले में उपलब्ध नहीं है। जिसके चलते आयुर्वेदिक व यूनानी चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरी हुई है। वहीं विभाग के अधिकारियों की भी मंशा ठीक न होने के कारण व्यवस्था और भी गडबडा गई है। हालत यह है कि विभाग के चिकित्सक व अधिकारी आपस में ही उलझे हुए हैं और एक-दूसरे पर आरो-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जिसके चलते मरीजों का इलाज करने के बजाए यह लोग केवल एक-दूसरे पर आरोप लगाने में लगे हैं। यहां तक की जिले के उच्च अधिकारियों तक  का असर इन पर नहीं हो रहा है। हाल ही में आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी द्वारा ऐसी ही एक बानगी पेश की थी।  प्रदेश की योगी सरकार द्वारा स्वास्थ्य व्यवस्थाएं सुधारने के लिए भले ही तमाम दावे किए जा रहे हेां। पर हकीकत यह है कि डेढ महीने से  अधिक बीतने के बाद भी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं आया है।  यही हाल जिले के आयुर्वेदिक व यूनानी अस्पतालों का भी है। जिले के आयुर्वेदिक व यूनानी अस्पताल सरकार की मंशा पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। जिले में 41 आयुर्वेदिक व दो यूनानी अस्पताल कदौरा व मुसमरिया में हैं। इनमें उरई व जालौन के अस्तपला 25 शैया के हैं। जबकि कोंच का आयुर्वेदिक अस्पताल 15 शैया का है। इन अस्पतालों में मरीजों के इलाज के लिए चिकित्साधिकारी के कुल 46 पद सृजित हैं। जिसके सापेक्ष मात्र दो दर्जन चिकित्साधिकारी ही तैनात हैं। बाकी अस्पतालों में जुगाड टैक्नोलॉजी सेे मरीजों का इलाज किया जा रहा है। यहां तक की विभाग का जिले स्तर का सबसे बडा पद क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी का पद भी खाली है। बम्हौरी के चिकित्साधिकारी एमडी मौर्या को इस पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, जो अपना दायित्व निभाने के बजाए आपस में ही उलझे हुए हैं। उन पर चिकित्सकों के उत्पीडन के आरोप लग रहे हैं। हाल ही में चिकित्साधिकारी डा0 कमलेश बाबू ने उन पर उत्पीडन का आरोप  लगाया है और इस संबंध में सीडीओ तक  से शिकायत की है। बीते दिनों सीडीओ ने आयुर्वेदिक चिकित्सकों की बैठक में कई घंटे तक व्यवस्थाएं सुधारने का पाठ पढाया था। पर सीडीओ की बैठक से बाहर निकलते ही क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी सब कुछ भूल गए और उन्होंने अपने ही महकमे के चिकित्सक कमलेश बाबू को देख लेने तक की धमकी दे डाली। इसका कारण यह था कि चिकित्सक कमलेश बाबू नियमानुसार अपना अटैचमेंट पास के ही अस्पताल में करने की गुहार लगा रहे थे। इसके लिए वह अपनी विकलांगता का भी हवाला दे रहे थे। पर इसके बावजूद भी क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी ने चिकित्सक की बात सुनने के बजाए उन्हें ही देख लेने की बात कह डाली। जब चिकित्सकों व अधिकारियों के बीच यह स्थिति है तो मरीजों को कितनी बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं इसका अंदाजा लगाया जा सकता है! अब देखना यह है कि सीडीओ के निर्देशों का असर महकमे के चिकित्सकों पर कब पडता है और आयुर्वेदिक व यूनानी चिकित्सका का लाभ मरीजों को कब मिल पाता है? 

रिपोर्ट : हेमन्त चौरसिया

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