​नगर पालिका के कार्य में गुलामी के प्रतीकों का महिमामंडन 

शहर के समाजसेवी ने जताई आपत्ति, डीएम को सौंपा ज्ञापन 
नगर  पालिका द्वारा घंटाघर पर कराया जा रहा निर्माण आया विवादों में
निर्माण में गुलामी के प्रतीक चिन्हों का इस्तेमाल करने का आरोप 
मनोज शर्मा

ऋषी न्यूज मुख्य संवाद ।

उरई शहर के बीचोंबीच स्थित घंटाघर चौराहे पर नगर पालिका द्वारा कराया जा रहा निर्माण इन दिनों विवादों में आ गया है। शहर के एक समाजसेवी ने इस निर्माण में गुलामी के प्रतीक चिन्हों को बनाए जाने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की है। इसके साथ ही शहर के बीचोंबीच जिस तरह से निर्माण की अनुमति दे दी गई है उस पर भी सवाल उठाया है और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। 
शहर के राठ रोड निवासी समाजसेवी व भाजपा नेता आशीष सेठ ने जिलाधिकारी नरेंद्र शंकर पांडेय को शिकायती पत्र सौंपा। जिसमें उन्हेांने बताया कि बीते दो वर्षों से घंटाघर चौराहे  पर नगर पालिका द्वारा एक निमा्रण कराया जा रहा है। इसे सार्वजनिक सरकारी अतिक्रमण भी कहा जाए तो गलत न होगा। अपने विशाल स्वरूप व देशवासियों के अपमान, नफरत, तिरस्कार से सुसज्जित प्रतीकों का निर्माण यहां पर कराया गया है। इनमें सांता क्लॉज के रूपक रंगों से सजे व परिसर के उच्च स्तम्भ पर अंग्रेजी साम्राज्यवाद का प्रतीक बिटिश संसद का प्रतीके बिग बेन, एलिजाबेथ क्लॉक टावर की उपरी कृति मौजूद है। इसी प्रतिबिंब ने हम देशवासियों को लंबे समय तक गुलाम बनाए रखा। जिसे आजाद कराने के लिए अनेकों क्रांतिकारी सर्वस्व न्यौछावर कर हंसते हंसते फांसी के फंदे पर झूल गए। ऐसे प्रतीकों का सार्वजनिक स्थल पर महिमामंडन कर आजादी के क्रांतिकारियों के त्याग और बलिदान को व्यर्थ साबित करता है। निश्चित रूप से इन प्रतीकों का सार्वजानिक प्रदर्शन एव स्वतंत्र, स्वाधीन राष्ट के लिए अपमान व शर्म का विषय है। उन्हेांने कहा कि यह भी बेहद उच्चस्तरीय जांच का विषय है  की इस भीडभाड वाले महत्वपूर्ण स्थल पर किस खास प्रयोजन से ऐसा निर्माण संपन्न कराया जा रहा है। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच की मांग की है। 

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